शुक्रवार, 13 जून 2008

अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो

अगले जन्म में औरत के रूप में पैदा होने की कल्पना से ही मैं कांप उठता हूँ। हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार नागार्जुन ने अगले जन्म में औरत होने की इच्छा प्रकट की थी। मगर मुझमें इतनी हिम्मत नहीं है। औरतों को क्या नहीं सहना पड़ता है। आज भी उन्हें पैदा होने से पहले पेट में ही मार दिया जाता है। ऐसा करने वालों में सभी वर्गों के लोग शामिल हैं। चाहे आप झुग्गी में चले जाए, या महंगे इलाकों में - हर जगह यही देखने को मिलेगा। ऐसा नहीं है कि पश्चिमी देशों में औरतों के साथ कोई भेदभाव नहीं होता है। वहाँ भी उन्हें हर तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। रात में घर से निकलकर यूं ही थोड़ा घूम कर आना उनके लिए भी खतरनाक होता है। बलात्कार की घटनाएं वहाँ भी होती हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में इतालवी भाषा का अध्ययन करते समय मुझे इटली में औरतों के साथ होने वाले भेदभाव के बारे में पता चला। हमारी मैडम इटली की निवासी हैं। उन्होंने हमें बताया कि वहाँ आज भी औरतों के साथ मारपीट की जाती है। उनसे ये उम्मीद की जाती है कि वे घर का काम भी संभालें और बाहर निकलकर कमाई भी करें। यह सब सुनकर मुझे ऐसा लगा कि मानव को सभ्य बनने में अभी बहुत समय लगेगा। नीचे औरतों की स्थिति से संबंधित कुछ तथ्य दिए गए हैं:

  1. दुनिया की हर तीसरी औरत को यौन दुष्कर्म या हिंसा का शिकार बनाया जाता है।
  2. १५ से ४४ वर्ष की लड़कियों और औरतों की मृत्यु या शारीरिक अक्षमता की वजह प्रायः हिंसा ही होती है।
  3. दुनिया के अशिक्षितों में दो-तिहाई औरतें होती हैं। उनकी पढ़ाई की अक्सर उपेक्षा की जाती है।
  4. दुनिया में हर मिनट एक औरत बच्चा पैदा करते मृत्यु की शिकार हो जाती है।

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